Kriya in Hindi क्रिया की परिभाषा, भेद, और उदाहरण

क्रिया किसे कहते है उसके भेद

हिन्दी व्याकरण क्रिया उदाहरण के साथ (hindi grammar kriya with examples)

क्रिया की परिभाषा (kriya ki paribhasha) :- 

''जिन शब्दों से किसी भी कार्य या काम का करना या होना समझ में आता है, उसे क्रिया कहते हैं।''जैसे - उठना, बैठना, पढ़ना, जाना, रोना, गाना आदि।
        हिंदी व्याकरण में चार विकारी शब्द होते हैं जिसमें क्रिया भी है क्रिया के रूपलिंग, वचन और पुरुष कर्त्ता के अनुसार बदलते हैं जैसे:-
१. खरगोश भागा ।

२. रमा ने खाना खाया ।

पहले वाक्य में खरगोश  'भागने' का काम किया है अतः 'भागाक्रिया हैं दूसरे वाक्य में रमा ने 'खाना खानेका कार्य किया अत: 'खायाक्रिया है।

'धातु' क्या है? (dhatu kya hai?)

जिस शब्द में विकार होने से क्रिया बनती है उसे धातु कहते हैं जैसे - 'पढ़ना' क्रिया में मूल शब्द 'पढ़ में '' प्रत्यय जोड़कर 'पढ़ा' शब्द बना है अतः 'पढ़ा' क्रिया की मूल धातु 'पढ़'  है।

                                    या

सीधे तौर पर कर सकते हैं कि जो क्रिया के मूल रूप होते हैं उसे ही 'धातु' कहते हैं

 सारांश यह है कि का मूल रूप धातु है। धातु क्रिया पद के उस अंश को कहते हैं जो क्रिया विशेष के सभी रूपों में पाया जाता है। अतः अतः जिन मूल अक्षरों से क्रियाएं बनती है उन्हें धातु कहते हैं उदाहरण के रूप में देखते हैं 'पढ़ना' और 'खाना' की मूल धातु 'पढ़' और 'खा' होगी।
 धातु के कितने भेद होते हैं?

उत्पत्ति या शब्द निर्माण के विचार से धातु के दो भेद होते हैं

१. मूल धातु

२. यौगिक धातु

मूल धातु स्वतंत्र होती है यह किसी अन्य शब्द पर निर्भर नहीं होती । जैसे - जाना, लिखना, उठना, बैठना आदि।

यौगिक धातु किसी प्रत्यय के मिलने से बनती है जैसे- जाना से 'जा', आना से '' उठना से 'उठा' पढ़ना से 'पढ़ा'

यौगिक धातु की रचना :- यौगिक धातु को तीन भागों में बांटा जा सकता है-

१. धातु में प्रत्यय लगाने से अकर्मक से सकर्मक और प्रेरणार्थक धातुएं बनती है।

२. संयुक्त धातु :- यह धातुएं कई धातुओं को संयुक्त करने से बनती है। संयुक्त धातु में दो या दो से अधिक धातुओं और दूसरे शब्दों के संयोग से या धातुओं में प्रत्यय लगाने से बनता है जैसे हंस से हंसना, हंसाना।

३. नाम धातु :-  संज्ञा, सर्वनाम एवं विशेषण शब्दों में प्रत्यय  लगाकर धातु का जो रूप बनता है उसे नाम धातु कहते हैं ।

संज्ञा से :-  लालच-ललचाना, बात-बतियाना

सर्वनाम से :- अपना-अपनाना

विशेषण से :- चिकना-चिकनाना, गर्म-गर्माना, दुहरा-दुहराना

प्रेरणार्थक क्रिया(prernarthak kriya) किसे कहते हैं?

क्रिया का ऐसा रूप जिससे ऐसा अनुभव होता है कि कर्ता साईं स्वयं कार्य ना करके किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा है उसे ही प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं जैसे उदाहरण के रूप में देखते हैं मोहन मुझसे लेख लिखवाता है यहां मोहन(कर्ता) स्वयं लेख ना लिखकर मुझे यानी दूसरे व्यक्ति को लिखने की प्रेरणा देता है उसे ही प्रेरणार्थक क्रिया(prernarthak kriya) 

कहा जाता है इसी प्रकार और भी उदाहरण देखते हैं-

राम मुझसे किताब पढ़वाता है।

मोहन मुझसे खाना बनवाता है।

वह अपने घर के लिए मुझसे  सामान मांगवाता है।

इन वाक्यों में भी व्यक्ति स्वयं से कार्य ना कर कर किसी दूसरे व्यक्ति से कार्य कराता है इसलिए यहां भी प्रेरणार्थक क्रिया है।

प्रेरणार्थक क्रियाओं के दो रूप हैं जैसे :- पढ़ना से 'पढ़ाना' और 'पढ़वाना'

दोनों ही क्रियाएं एक के बाद दूसरी प्रेरणा में हैं। यहां हमें या बात ध्यान देने की आवश्यकता है कि अकर्मक क्रिया प्रेरणार्थक होने पर सकर्मक क्रिया हो जाती है जैसे: -

राधा नाचती हैं।

कृष्ण की मुरली राधा को नाचवाती है।

प्रेरणार्थक क्रिया में आने वाली कुछ शब्द-

मूल शब्द(प्रथम)
प्रेरणार्थक  शब्द (द्वितीय,तृतीय)
पढ़ना
पढ़ाना, पढ़ाना
लिखना
लिखाना, लिखवाना
चलना
चलाना, चलवाना
हंसना
हंसाना, हंसवाना
सोना
सुलाना, सुलवाना


प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के नियम

मूल धातु के अंत में '' के स्थान पर जोड़ने पर '' जोड़ने पर प्रथम प्रेरणार्थक तथा '' जोड़ने पर द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया बनती है जैसे :-  पढ़-पढ़ा-पढ़वा

'ले' के अतिरिक एक वर्णवाली धातुओं के दीर्घस्वर को लघु करके अंत में 'ला' जोड़ने से प्रथम प्रेरणार्थक तथा 'लवा' जोड़ने से द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया बनती है जैसे :- पी-पिला-पिलवा

क्रिया के भेद (kriya ke bhed)

रचना की दृष्टि से क्रिया के दो भेद हैं

१. सकर्मक क्रिया

२. अकर्मक क्रिया

१. सकर्मक क्रिया:-

 क्रिया का वह रूप जिसका फल या प्रभाव किसी दूसरी वस्तु या व्यक्ति अर्थात कर्म पर पड़े या काम करने वाले पर पड़े तब वहां सकर्मक क्रिया होता है उदाहरण के रूप में देखें मोहन खाना खाता है। इस वाक्य में मोहन कर्ता है जिसका सीधा संबंध 'खाना' से है  जिसका सीधा प्रभाव कर्ता पर या काम करने वाले पर पड़ रहा है जो खाना है प्रश्न है मोहन क्या खाता है? उत्तर है खाना। अतः मोहन से खाने का सीधा संबंध है इसलिए इस वाक्य में 'खाना' सकर्मक क्रिया है ।कभी-कभी सकर्मक क्रिया में क्रम छिपा रहता है जैसे-
  • वह गाता है।
  • वह पढ़ता है।
यहां पर कर्म या काम छिपा है जो है गीत और पुस्तक अर्थात 
  • वह गाना गाता है।
  • वह पुस्तक पढ़ता है।

सकर्मक क्रिया की पहचान कैसे करें?

सकर्मक क्रिया की पहचान करने के लिए वाक्यों में क्या, किस या किसको लगाकर प्रश्न करें यदि उन प्रश्नों का उत्तर मिल जाता है तो वहां सकर्मक क्रिया होता है और जो उत्तर मिलता है वही सकर्मक क्रिया होती है। जैसे उदाहरण के रूप में कुछ वाक्य देख लेते हैं-

रमेश ने कविता सुनाएं

रवि खाना बनाता है।

अभिषेक पतंग उड़ा रहा था।

इन वाक्यों में क्या प्रश्न करने से उत्तर मिल जाता है इसलिए इन वाक्यों में सकर्मक क्रिया है जैसे

रमेश ने क्या सुनाएं?                         उत्तर: कविता

 रवि क्या बनाता है ?                        उत्तर: खाना

अभिषेक क्या उड़ा रहा था?               उत्तर: पतंग

कभी-कभी सकर्मक क्रिया में कर्म छिपा रहता है जैसे वह गाता है वह पढ़ता है इन दोनों वाक्यों में कर्ता छिपा हुआ है जो है - गीत तथा पुस्तक ।

२. अकर्मक क्रिया (akarmak kriya):-

 जिन क्रियाओं में कर्म का फल सिर्फ कर्ता पर ही पड़ता है या सीमित रहता है तब वहां अकर्मक क्रिया होता है जैसे मोर नाचता है इसमें नाचना क्रिया अकर्मक है मोर कर्ता है नाचने की क्रिया उसी के द्वारा पूरी होती है नाचने का फल भी उसी पर पड़ता है इसलिए नाचना क्रिया अकर्मक है।

अकर्मक क्रिया की पहचान कैसे करें?

जिन वाक्यों में क्या, किसे या किसको आदि प्रश्न करने से यदि उनका उत्तर नहीं मिलता है तो वहां अकर्मक क्रिया होती है और यदि इन प्रश्नों से उत्तर करने पर उनका उत्तर मिल जाता है तब वहां अकर्मक क्रिया नहीं होकर सकर्मक क्रिया होता है। कुछ उदाहरण देखते हैं

छात्राएं आ गईं।

छात्रा घूमने गए।

इन वाक्यों की क्रियाएं आ गईं और घूमने गए अकर्मक क्रिया आए हैं इनमें क्रियाओं का फल करता पर पड़ता है। इन वाक्यों से क्या कहां किसको लगा कर प्रश्न करें। यादें इनका उत्तर नहीं मिलता है तो यहां अकर्मक क्रिया होती है कहां आ गईं? इसका उत्तर नहीं मिला। कहां घूमने गए इसका भी उत्तर नहीं मिला इन दोनों क्रियाओं के उत्तर नहीं मिलने के कारण यहां अकर्मक क्रिया हैं।

 सहायक क्रिया किसे कहते है या क्या है?


जो क्रिया है मुख्य क्रिया के साथ अर्थ को स्पष्ट और पूरा करने में सहायक होती है मैं सभी सहायक क्रियाएं कहलाती है हिंदी में सहायक क्रियाओं का प्रयोग व्यापक अर्थ में होता है इनमें परिवर्तन काल या समय के अनुसार बदल जाता है जैसे

वह खाता है ।

मैंने पढ़ा था।

तुम जगे हुए थे।

इन वाक्यों में खाना, पढ़ना, जगना मुख्य क्रियाएं हैं और है, था, हुए थे सहायक क्रियाएं  हैं।

क्रियार्थक संज्ञा किसे कहते हैं उदाहरण देकर समझाइए।

जब किसी वाक्य में क्रिया संज्ञा की तरह काम करता है या व्यवहार में आता है तब वहां क्रियार्थक संज्ञा होता है जैसे

टहलना, स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।

देश के लिए मरना कहीं श्रेष्ठ है।

इन वाक्यों में टहलना और श्रेष्ठ है क्रिया शब्द है लेकिन इन वाक्यों में क्रिया का अर्थ संज्ञा के रूप में प्रयुक्त किया गया है।

विकार के आधार पर क्रिया के कितने भेद होते हैं?

     विकार के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं-

१. समापिका क्रिया - मैं प्रात: काल मैं उठता हूं।

२. असमापिका क्रिया - सूचना पाते ही मैं चला गया।

वर्तमान कालिक कृदन्त और भूत कालिक कृदन्त में क्या अंतर है?

धातु के अंत में 'ता' प्रत्यय के योग से क्रिया का जो रूप बनता है वह वर्तमान कालिक कृदन्त होता है जैसे :- पढ़ + ता = पढ़ता।

 किंतु धातु के अंत में '' प्रत्यय लगने से क्रिया का जो रूप बनता है वह भूत कालिक कृदन्त होता है जैसे :-  पढ़ + आ = पढ़ा।

पूर्व कालिक कृदन्त और तात्ककालिक  कृदन्त में क्या अंतर है?

धातु के अंत में कर, के और करके के योग से पूर्वकालिक कृदन्त क्रिया का रूप बनता है जबकि वर्तमान कालिक कृदन्त के विकृत रूप के संयोग से तात्कालिक कृदन्त क्रिया का रूप बनता है जैसे -

 उठ + कर, के, करके = उठकर, उठके, उठकरके (पूर्व कालिक कृदन्त)

उठते + ही  = उठते ही। (वर्तमान कालिक कृदन्त)

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