अनुच्छेद लेखन, परीक्षा के दिन, अनुशासन का महत्त्व

अनुच्छेद लेखन, परीक्षा के दिन, अनुशासन का महत्त्व

किसी एक भाव या विचार पर लिखे
गए वाक्यों के समूह को अनुच्छेद कहते है।

अनुच्छेद में भाव या विचार को संक्षेप में स्पष्ट किया जाता है। विद्यार्थियों को कक्षा के अनुसार अनुच्छेद दस से लेकर 17 वाक्यों में लिखे जाते हैं। अनुच्छेद किसी भी विषय
पर
  लिखे जा सकते हैं।

                     अनुच्छेद में हम जो कुछ भी लिखते है वे अनुच्छेद के विषय से संबन्धित रहता है उसमें अनावश्यक वाक्य या शब्द के लिए उसमें कोई स्थान नहीं होता । अनुच्छेद में घटना अथवा विषय से सम्बध्द वर्णन संतुलित तथा अपने आप में पूर्ण होन चाहिए। अनिच्छेद की भाषा – शैली  सजीव एवं प्रभावशाली होना चाहिए। शब्दों एवं वाक्यों को प्रभावशाली बनाने के लिए मुहावरे एवं लोकोक्तियों का भी प्रयोग करना चाहिए।

अनुच्छेद लेखन किसे कहते है ?

” किसी भी घटना या दृश्य अथवा विषय को संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित ढंग से जिस लेखन शैली में प्रस्तुत किया जाता हैउसे ही अनुच्छेद लेखन कहते है। ”

 कुछ उदाहरण :-

परीक्षाओं के दिन

वर्ष भर एक ही कक्षा में रहने के बाद छात्र को परीक्षा देनी होती है जिसमें उत्तीर्ण होने के बाद वह अगली कक्षा में जाता है। परीक्षा का नाम ही भयभीत करने वाला है। कहावत है कि परमात्मा किसी को भी परीक्षा में न डालेकिन्तु विद्यार्थी के लिए तो परीक्षा अनिवार्य है। परीक्षा ही वह द्वार है जिसको पार करके कोई विद्यार्थी अगली कक्षा कि मंजिल तक पहुंचता है। परीक्षा के दिनों में छात्र को कुछ भी अच्छा नहीं लगता हैं । उसकी भूख-प्यास भी भाग जाती है । घर में शोर हो रहा हो या अतिथि आ जाए तो वह झुँझला उठता है सारा ध्यान पुस्तकों में ही लगा रहता है कभी वह एक  विषय की पुस्तक उठता तो कभी दूसरे की । उसका प्रयत्न यही होता है कि हर विषय की तैयारी अच्छी हो जाए। कभी-कभी उसे ऐसा लगता कि उसकी तैयारी अच्छी हो गई है और कभी ऐसा लगता है कि उसकी तैयारी  कुछ भी नहीं हुई है। वह पूरी तैयारी में लगा रहता।  रात को देर रात तक पढ़ाई करता और पाठ को दुहराता रहता ताकि कोई भी पाठ छूट न जाए। उसके चेहरे में चिंता के बादल छाए रहते है वह मन ही मन ईश्वर को भी याद करता रहता है कि इस बार अच्छे अंकों से पास कर दे और अगले वर्ष इससे भी और अधिक परिश्रम करूंगा। माँ इन दिनों उसका विशेष ध्यान रखती है। उसे अच्छे अच्छे पकवान और पौष्टिक भोजन देती है ताकि उसका तबीयत भी खराब न हो और वह ठीक से परीक्षा दे पाए। परंतु वह कभी चिंतामुक्त नहीं हो सकता है जब तक कि परीक्षा समाप्त नहीं हो जाती है। परीक्षाओं के दिन कैसे बीतते हैं इसे विद्यार्थी ही जानते हैं ।   

अनुशासन का महत्त्व

अनुशासन से तात्पर्य है अपने आप को कुछ नियमों से बाँधे रखना और उसके अनुसार कार्य करना। अनुशासन द्वारा प्रत्येक व्यक्ति अपना पूर्ण विकास कर सकता है। अनुशासन में जीने का अपना आनंद होता है । अनुशासनहीनता जंगल में रहने के समान है। जंगली जानवरों में अनुशासन नहीं होता। उनका जीवन असुरक्षित और अव्यवस्थित होता है। जिसमें सबसे अधिक ताकत होता है वही जंगल में राज करता है पर मनुष्यों में ऐसा नहीं होता है वे कभी इन्सानों को समान दृष्टि से देखते है और सभी नियमों का पालन भी करते है नियम में चलना ही अनुशासन कहलाता है इसलिए तो हर स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए एक समान नियम बनाया जाता है सभी को अनुशासन की पाठ पढ़ाया जाता है और सीखाया जाता है ताकि उनमें  सगुण का विकास हो। हर इंसान को अनुशासन में रहना चाहिए ये हर इंसान का धर्म है एक अच्छे नागरिक बनने के लिए उसमें अनुशासन का होना बहुत जरूरी है तभी देश विकास होगा।  

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