बहुलक क्या है - बहुलक की परिभाषा, बहुलक के गुण(लाभ) एवं दोष,बहुलक के प्रकार, सूत्र

बहुलक क्या है
बहुलक क्या है बहुलक के गुण(लाभ) एवं दोष

बहुलक क्या है (mode in hindi)

सबसे पहले सवाल आता है कि बहुलक क्या है? बहुलक को अंग्रेजी में मोड कहते हैं Mode शब्द फ्रेंच भाषा के La modo से उद्धृत किया गया है जिसका अर्थ है रिवाज या फैशन। सांख्यिकी में बहुलक उस मूल्य को कहते हैं जो समंक माला में सबसे अधिक बार आता है। अर्थात् जिसके सबसे अधिक आकृति हो उसे ही बहुलक कहते हैं।

 

बहुलक की परिभाषा क्या है(mode in hindi)

बहुलक की परिभाषा क्रो एवं क्रो के अनुसार : "प्राप्तांकों के समूह में जिस अंक की आवृत्ति सबसे अधिक होती है बहुलक कहलाती है।"

बहुलक की परिभाषा गिलफोर्ड के अनुसार : " किसी भी तरह में वह बिंदु जिसकी आवृति सर्वाधिक हो बहुलक कहलाता है।"

बहुलक की विशेषताएं

केंद्रीय प्रवृत्ति के विभिन्न मांपों में बहुलक का अपना एक विशेष महत्व है या मध्यांक की तरह अंक वितरण के आरंभ हुआ अंत के अंकों से प्रभावित नहीं होता है परंतु वुफछ स्थितियों में या मान केंद्रीय प्रवृत्ति का सबसे अधिक प्रतिनिधित्व करता है।

बहुलक के गुण(लाभ) (mode in hindi)

  1. किसी अंक वितरण में इसकी गणना सबसे अधिक सरल है।
  2. इसका उपयोग उस स्थिति में बहुत उपयोगी होता है, जबकि केवल सामान्य केंद्रीय प्रवृत्ति को जानना ही हमारा उद्देश्य रहता है।
  3. बहुलक वितरण का सबसे अधिक संभावित मूल्य तथा सबसे अधिक महत्वपूर्ण मूल्य होता है यह सीमांत अंको को महत्व ना देकर केवल सबसे अधिक प्रचलित अथवा लोकप्रिय अंको को महत्व देता है।
  4. व्यवहारिक जगत में इसका उपयोग सबसे अधिक होता है।

बहुलक के दोष(mode in hindi)

  1. बहुलक का प्रयोग उसी स्थिति में हो सकता है जबकि वितरण की संख्या बहुत अधिक हो।
  2. इसका गणितीय विवेचन नहीं होता बल्कि व्यवहारिक होता है।
  3. शुद्ध बहुलक की गणना प्राय: जटिल होती है।

बहुलक के प्रकार (mode in hindi)

बहुलक दो प्रकार के होते हैं

१.अशुद्ध बहुलक

२.शुद्ध बहुलक

१.अशुद्ध बहुलक : अशुद्ध बहुलक एक अंक वितरण का वह मान होता है चौकी केवल अंक वितरण में सबसे अधिक आवृत्ति वाले अंक पर निर्भर होता है।

२.शुद्ध बहुलक : शुद्ध बहुलक को ज्ञात करने की आवश्यकता प्राय: विस्तृत आंकड़ों के विषय में पड़ती है। शुद्ध बहुलक को ज्ञात करने के लिए सम्मोहन विधि अथवा अंतर्वेशन विधि का प्रयोग किया जाता है।

बहुलक की गणना के लिए सूत्र

`Z = L+\frac{f-f1}{(f-f1)+(f-f2)}\times i`

प्र. 

वर्गान्तर

आवृति

70 – 80

81-90

91-100

101-110

111-120

121-130

131-140

2

5

8

12

6

4

5

 बहुलक निकालने का आसान तरीका

उत्तर :

वर्गान्तर

आवृति

70 – 80

81-90

91-100

101-110

111-120

121-130

131-140

2

5

8 f1

12 f

6 f2

4

5

Z = अंक वितरण का बहुलक

f = बहुलक वर्गान्तर की आवृति = 12

f1 = बहुलक वर्गान्तर से ठीक पूर्व वाले वर्गान्तर की आवृति = 8

f2 = बहुलक वर्गान्तर से ठीक पश्चात वाले वर्गान्तर की आवृति = 6

i = वर्गान्तराल = 10

L = बहुलक = 101

दिए गए अंक वितरण का बहुलक वर्गान्तर 101-110 है ।

बहुलक का सूत्र

`Z = L+\frac{f-f1}{(f-f1)+(f-f2)}\times i`

`Z = 101+\frac{12-8}{(12-8)+(12-6)}\times 10`

`Z = 101+\frac{4}{(4)+(6)}\times 10`

`Z = 101+\frac{4}{10}\times 10`

Z = 101 + 4 

Z = 105

बहुलक की गणना (mode in hindi)

बहुलक की गणना तीन श्रेणी के माध्यम से किया जाता है

1.    व्यक्तिगत श्रेणी (Individual series)

2.    खंडित श्रेणी (Discrete series)

3.    सतत श्रेणी (Continuous Series)

बहुलक ज्ञात करने के लिए समूहन विधि (grouping method)

बहुलक को ज्ञात करने की उपर्युक्त जिन विधियों का वह सूत्रों का प्रयोग किया गया है वहां हमें बहुलक से आसानी से ज्ञात होता है परंतु आवृत्ति वितरणों मैं कभी-कभी ऐसी भी स्थिति आती है जबकि अधिकतम आवृत्ति वाले वर्ग अंतर एक न हो कर दो होते हैं। ऐसे आवृत्ति वितरण को द्विमुखी आवृत्ति वितरण कहते हैं। कभी-कभी अधिकतम आवृत्ति वाले वर्ग अंतर किस संख्या 3 भी हो जाती है। ऐसी स्थिति में वह त्री मुखी आवृत्ति वितरण कहलाता है। जब आवृत्ति वितरण में अधिकतम आवृत्तियों वाले वर्ग अंतर की संख्या 3 से भी अधिक हो जाती है तब ऐसी स्थिति में वह आवृत्ति वितरण बहुमुखी आवृत्ति वितरण कहलाता है। ऐसी स्थिति में बहुलक को सामूहिक विधि से ज्ञात किया जाता है।

बहुलक की गणना लिए सूत्र सामूहिक विधि ज्ञात करने के लिए

`Z\=3M-2\overset-X`

समूहन विधि के चरण (steps of grouping method)

पहले चरण में प्रथम स्तंभ में आवृत्ति वितरण के वर्गांतरों को आवृत्तियों के ऊपर से युग्म बनाएं जाते हैं तथा उनके योग को स्तंभ नंबर 2 में लिख दिया जाता है।

दूसरे चरण में सबसे ऊपर वाले वर्ग अंतर की आवृत्ति को छोड़ दिया जाता है तथा फिर वर्ग मंत्रों के युग्मों की आकृतियों का योग ज्ञात कर लिया जाता है। इसे तीसरे स्तंभ में लिखा जाता है।

तीसरे चरण में आवृत्ति वितरण की आवृतियों को ऊपर से 3 के समूहों में जोड़ा जाता है तथा इस प्रकार प्राप्त योगों को स्तंभ नंबर 4 में लिख दिया जाता है।

चौथे चरण में, आवृत्ति वितरण की आकृतियों के तीन-तीन के समूह बनाने के लिए सबसे ऊपर वाले वर्गांतर की आवृत्ति को छोड़ दिया जाता है तथा प्राप्त लोगों को स्तंभ नंबर 5 में लिख दिया जाता है।

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