इतिहास का संबंध -अर्थशास्त्र, भूगोल, नागरिक शास्त्र के साथ


 इतिहास का संबंध अर्थशास्त्र के साथ (itihas ka sambandh arthshastra ke sath)

इतिहास तथा अर्थशास्त्र में गहरा संबंध है समाज की आर्थिक स्थिति ही ऐतिहासिक घटनाओं का निर्माण तथा निर्धारण करती है। अनेक युद्ध केवल इसलिए जीतेंगे क्योंकि विजेता अधिक साधन संपन्न थे। तथा अनेक आक्रमण केवल इसलिए हुए कि वे समृद्ध देश से लूट कर अपार संपदा अपने साथ ले जाए। समाज के आर्थिक स्थिति के कारण ही प्राचीन किले भवन तथा साहित्य के प्रगति अतीत में देखी जाती है। अतीत में जो समाज असभ्य, जंगली, निर्धन, तथा आदिम अवस्था में थे। उनका इतिहास जानने का स्रोत भी नहीं मिलते हैं। इनके विपरीत उन्नत समाजों का इतिहास जानने के अनेक स्रोत सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं।
आर्थिक अवस्था में परिवर्तन स्वत: इतिहास में परिवर्तन ला देते हैं। इतिहास बताता है कि अतीत में अनेक राजाओं, बादशाहों, सुल्तानों आदि में केवल भौतिक सुख के उपभोग के लिए ऐतिहासिक घटना घटित की तो कुछ राजा महाराजा भोग विलास में इतने लोग तो हो गये कि उन्हें अपने सिंहासन से हाथ तक धोना पड़ा। आर्थिक अवस्था इतिहास का महत्वपूर्ण पत्र है जो कि यह बताता है कि इतिहास को प्रभावित करती हैं और इतिहास समाज के आर्थिक स्थिति को।

इतिहास का संबंध भूगोल के साथ(itihas ka sambandh bhugol ke sath)

इतिहास और भूगोल दोनों ऐसे सामाजिक विषय हैं जिनमें घनिष्ठ संबंध है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक ऐतिहासिक घटनाओं पर भौगोलिक परिस्थितियों का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। नदी नाले, सागर, पहाड़, पर्वत, रेगिस्तान, उपजे जलवायु आदि। अनेक भौगोलिक दशाएं तथा तत्व किसी देश के इतिहास को प्रभावित करते हैं। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ही कुछ देशों के इतिहास में कुलेखनी घटनाएं घटित हुई हैं। प्राचीन युग में राजा, महाराजाओं ने अपने केले सुरक्षा की दृष्टि से ऊंची पहाड़ियों पर किले बनवाए और जहां पहाड़ियां नहीं थी। वह मैदानी के लिए बने। किंतु उसके सुरक्षा हेतु खाई आदि बनवाई गई।
सिकंदर का पूरू के बीच युद्ध में सतलाज नदी तथा वर्षा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिमालय पर्वत के कारण भारत पर उत्तर की दिशा से तथा समुद्र के कारण दक्षिण की दिशा में आक्रमण नहीं हुआ विश्व में ऐसी अनेक ऐतिहासिक घटनाएं हैं जो भौगोलिक तत्व से प्रभावित हुए जैसे हिटलर की रूस में हार होने का कारण बर्फीली तूफान ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।
भौगोलिक परिस्थितियां अप्रत्यक्ष रूप से भी इतिहास को प्रभावित करती हैं। किसी देश के निवासी अच्छे वीर तथा साहसी सैनिक होते हैं। इस पर अन्य तत्वों के अलावा भौगोलिक तत्वों का भी प्रभाव पड़ता है। जैसे उनका खान-पान, रहन-सहन, जीवन-यापन आदि।
इतिहास अतीत के घटनाओं का विवेचन करता है किंतु ऐतिहासिक घटना कर्मो की व्याख्या तथा विश्लेषण करने के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का ज्ञान होना आवश्यक है। क्योंकि बिना भौगोलिक परिस्थितियों के ज्ञान के युद्ध राज्य विस्तार जय- पराजय आदि की व्याख्या संभव नहीं लगती है। क्योंकि प्रत्येक ऐतिहासिक घटना पर भूगोल की छाप निश्चित ही पड़ती है।

इतिहास का संबंध नागरिक शास्त्र के साथ(itihas ka sambandh nagrik Shastra ke sath)

इतिहास मानव सभ्यता का भंडार है। इतिहास प्राचीन काल में हुए घटनाओं का संकलन व्यवस्था संगठन तथा विश्लेषण करता है। और भूतकाल में किसी समाज द्वारा उत्थान तथा पतन की परिस्थितियों तथा कारणों की व्याख्या करता है। इतिहास हमें बताता है कोई समाज अपने अतीत में किन-किन आर्थिक, समाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक अवस्थाओं से गुजरता है। इतिहास समाज के रीति-रिवाजों, परंपराओं, कलाओं, अच्छाइयों, बुराइयों, संस्थाओं आदि के उत्थान पतन की कहानी है। इतिहास हमें भूतकाल में की गई त्रुटियों या गलतियों को पुन: न करने का ज्ञान देता है। इतिहास पारस्परिक कला, द्वेष, कूट तथा लालच के मानव से हमें अवगत कराता है। इस प्रकार से इतिहास सहयोग सहकारिता तथा सहिष्णुता जीवन व्यतीत करने की शिक्षा प्रदान करता है।
      नागरिक शास्त्र वर्तमान काल सामाजिक तथा राजनीतिक समस्याओं का अध्ययन तथा विश्लेषण करता है नागरिक शास्त्र समाज के उन बुराइयों तथा कुरीतियों से अवगत कराता है, जिनके कारण अतीत में भयंकर युद्ध हो चुके हैं। नागरिक शास्त्र अनेक सामाजिक बुराइयों की उत्पत्ति का पता लगाकर उन्हें दूर करने का चेष्टा करता है। छुआछूत जाति प्रथा दहेज प्रथा भाषावाद प्रांतीयता तथा संप्रदायिकता आदि समस्याओं के उदय के कारण तथा इनके निदान के उपाय की विवेचना नागरिक शास्त्र में छुपी है।
      नागरिक शास्त्र भूतकाल की सफलताओं तथा असफलताओं को परिपेक्ष्य में रखकर ही वर्तमान तथा भविष्य के लिए कार्य योजनाएं बनाई जाती है।
            इतिहास का शिक्षक इतिहास इतिहास का शिक्षण करते समय अनेक स्थलों पर इतिहास का संबंध नागरिक शास्त्र के साथ कर सकता है महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, वीर शिवाजी आदि पढ़ाते समय इतिहास का शिक्षक बड़ी सरलता से बालकों में देश प्रेम की भावना जागृत कर सकता है।

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