अभिप्रेरणा की विधियाँ (techniques of motivation)

अभिप्रेरणा की विधियाँ।।Abhiprerna Ki Vidhiyan ।।कक्षा में बच्चों को प्रेरित करने की विधियां।।कक्षा में बच्चों को अभिप्रेरित करने की विधियां।।

आज के बच्चे अपने कर्तव्य से पीछे हट रहे हैं तथा उन्हें पढ़ाई या अपने कर्तव्यों से कोई मतलब नहीं होता इन्हीं को ध्यान में रखकर कक्षा में बच्चों को प्रेरित या अभिप्रेरित(motivated) करने की आवश्यकता होती है ऐसा करने से बच्चों में एक प्रकार की उत्तेजना उत्पन्न होती है और यही उत्तेजना बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन करने लगता है। जिससे बच्चे और अधिक अपने कामों में सक्रिय होने लगते हैं।इसलिए कक्षा में अभिप्रेरणा (motivation) का महत्वपूर्ण स्थान है। कक्षा में बच्चे दो प्रकार से अभिप्रेरित होते हैं पहला बाह्य अभिप्रेरणा से दूसरा आंतरिक अभिप्रेरणा से।
अभिप्रेरणा की विधियाँ (techniques of motivation)
 

कक्षा में बच्चों को प्रेरित करने की विधियां (techniques of motivation) या अभिप्रेरणा की विधियाँ या अभिप्रेरणा की तकनीक

  1. बाल केंद्रित दृष्टिकोण
  2. नहीं ज्ञान को पूर्व ज्ञान से संबंधित करना
  3. शिक्षण में प्रभावशाली तथा सहायक साधनों का प्रयोग
  4. उद्देश्य एवं लक्ष्य का निश्चित होना
  5. परिणाम एवं प्रोन्नति का ज्ञान
  6. शिक्षक का व्यवहार
  7. प्रशंसा एवं आलोचना
  8. पुरस्कार एवं दंड
  9. प्रतियोगिता एवं सहयोग
  10. कक्षा का वातावरण
  11. उचित दृष्टिकोण का विकास
  12. सीखने की उचित स्थिति और वातावरण
  13. असफलता का भय
  14. आकांक्षा का स्तर 
  15. नयापन या नवीनता

1.बाल केंद्रित दृष्टिकोण:

कक्षा को शिक्षक केंद्रित नहीं बनाकर बाल केंद्रित बनाना चाहिए। ऐसा करने से बालक के मानसिकता पर प्रभाव पड़ता है। क्योंकि बालक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर पढ़ाया जाए तो बालक उससे अभिप्रेरित होकर पूरी निष्ठा एवं लगन के साथ उसे सीखने/करने में एकजुट हो जाते हैं इसलिए कक्षा को बाल केंद्रित बनाना चाहिए ना कि शिक्षक केंद्रित। जहां शिक्षक आकर कुछ भी पढ़ा कर चला जाए और बच्चे को समझ में भी ना आए ऐसी शिक्षा से क्या मतलब।techniques of motivation

2.नयी ज्ञान को पूर्व ज्ञान से संबंधित करना:

कक्षा में पढ़ते समय शिक्षक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जो भी पढ़ाया जा रहा हैं उसका संबंध उसके पूर्व ज्ञान से होना चाहिए या पूर्व ज्ञान से जोड़ते हुए उसे पढ़ाना या समझाना चाहिए ताकि बालक उसे पूर्व ज्ञान से जोड़कर नये ज्ञान को भी समझ सके ऐसा करने से बालक उस विषय में रूचि लेता है और नई-नई सूचनाएं एकत्रित करने लगता है।अभिप्रेरणा की विधियाँ

3.शिक्षण में प्रभावशाली तथा सहायक साधनों का प्रयोग:

कक्षा में शिक्षक को कक्षा के स्तर से विभिन्न शिक्षण विधियों(techniques) का प्रयोग करते हुए प्रभावशाली ढंग से पढ़ाना चाहिए। किसी वर्ग विशेष के छात्रों के लिए शिक्षण विधि वह होती है जिसमें छात्रों की रुचि होती है और जिसके द्वारा वे जल्दी सीखने लगते हैं। इसके लिए शिक्षक को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वह हर स्तर के लिए अलग-अलग शिक्षण विधियों का प्रयोग कर कक्षा को प्रभावशाली बना सकें।

4.उद्देश्य एवं लक्ष्य का निश्चित होना:

शिक्षक को बालक के उद्देश्य एवं उनके लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें शिक्षा देना चाहिए तथा उन्हें बार-बार उन शिक्षा शास्त्रियों, बड़े विद्वानों, मनोवैज्ञानिकों, उन सफल व्यक्तियों का उदाहरण देते हुए उनके उद्देश्य एवं लक्ष्य का आभास कराना चाहिए। ऐसा करने से बालक अभिप्रेरित होते हैं तथा अपने उद्देश्य एवं लक्ष्यों से नहीं भटकते हैं। विद्यार्थी जब तक अपने सीखने के लक्ष्यों को नहीं जाने का तब तक वह कैसे अभिप्रेरित हो पाएगा। लक्ष्य विद्यार्थी को कार्य करने के लिए या सीखने के लिए दिशा प्रदान करता है और जब विद्यार्थी को दिशा मिल जाए तो वह लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बड़ी तीव्रता से अभिप्रेरित हो जाता है।
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5.परिणाम एवं प्रोन्नति का ज्ञान:

कक्षा में हर प्रकार के विद्यार्थी होते हैं उनका मूल्यांकन करने के लिए शिक्षक एक तो कक्षा में किसी प्रकार का टेस्ट या परीक्षा लेता है ताकि उनसे उन बच्चों के स्थिति को जान सके। बच्चे भी अपने परिणामों को जाने के लिए उत्सुक होते हैं। शिक्षक ऐसा कर बच्चों की कमजोरी या परिणाम को उन्हें बता कर उन्हें पदोन्नति करने में सहायक होता है। ऐसा करने से बच्चों को डिमोटिवेट होने से बचाया जा सकता है। और उसे मोटिवेट कर उनके पढ़ाई में स्थिति अनुसार बदलाव करने का सुझाव दिया जाता है ताकि वे अपने जीवन में पदोन्नति कर सके।

6.शिक्षक का व्यवहार:

कक्षा में शिक्षक का व्यवहार भी बच्चों को मोटिवेट या डिमोटिवेट करता है। शिक्षक का जैसा व्यवहार होगा बच्चे भी वैसे ही शिक्षक की बातों पर ध्यान देंगे। चिड़चिड़ा या गुस्साइल प्रवृत्ति के शिक्षक को कोई पसंद नहीं करता। वहीं मधुर वाणी, सप्रेम, सहानुभूति जैसे शिक्षक को सभी महत्व देते हैं। शिक्षक अपने प्रेम, सहानुभूति, सहयोग पूर्ण व्यवहार से विद्यार्थियों की अभिप्रेरणा को सरलता से बढ़ा सकता है। यह कार्य छात्रों के भावनाओं का सम्मान करके उन्हें अभिव्यक्ति के स्वतंत्र अवसर प्रदान करके और उनकी समस्याओं का तुरंत हल करके किया जा सकता है।

7.प्रशंसा एवं आलोचना:

शिक्षक को कक्षा में इस बात का भी ध्यान देना पड़ता है कि उनके बातों एवं विचारों से किसी भी विद्यार्थी की भावना को ठेस ना पहुंचाएं। ऐसे में विद्यार्थी डिमोटिवेट होते हैं क्योंकि अगर ऐसा होता है तो वह विद्यार्थी उस शिक्षक के बातों या पढ़ाये जाने वाले विषय पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देगा। जिससे विद्यार्थी पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। बालक की अच्छे कर्मों पर उनकी प्रशंसा करनी चाहिए और बुरे कर्मों पर आलोचना ना कर उन्हें समझाना चाहिए ताकि वे अपनी गलतियों को समझ कर उन्हें सुधार सकें तथा उससे अभिप्रेरित होकर अपने लक्ष्य को पा सके। प्रशंसा अभिप्रेरणा के लिए अधिक प्रभावशाली ढंग से कार्य कर सकती है। हर विद्यार्थी प्रशंसा का इच्छुक होता है अतः इस प्रशंसा को प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी या व्यक्ति कार्य करने यह कार्य सीखने के लिए सदा ही अभिप्रेरित रहता है वही वे किसी भी प्रकार की आलोचना को बर्दाश्त नहीं करता है।अभिप्रेरणा की विधियाँ

8.पुरस्कार एवं दंड:

विद्यार्थी पुरस्कार का भूखा होता है। पुरस्कार और दण्ड अभिप्रेरणा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रविधि है ये दोनों ही व्यक्ति के या विद्यार्थी के व्यवहार में अभिप्रेरणा का संचार करता है। पुरस्कार किसी भी रूप में हो सकता है किसी भी वस्तु से सम्मानित कर या विद्यार्थी या व्यक्ति की प्रशंसा करके। उसी प्रकार दंड भी शारीरिक या भय दिखा कर हो सकता है लेकिन विद्यार्थी जीवन में दंड का प्रयोग कम ही करना चाहिए अधिक दंड का प्रयोग करने से भी विद्यार्थी के व्यवहार में परिवर्तन होता है और वे डिमोटिवेट होने लगते हैं। पुरस्कार से विद्यार्थी में आत्म सम्मान आत्मविश्वास तथा योग्यताओं का विकास होता है। दंड व्यक्ति में अनुचित कार्य न करने के लिए भय का काम करता है पुरस्कार और डंका गलत अवसरों पर प्रयोग करने पर कई बार हानिकारक सिद्ध होता है अतः अध्यापक को इन प्रविधियों का प्रयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

9.प्रतियोगिता एवं सहयोग:

विद्यार्थी या व्यक्ति के जीवन में प्रतियोगिता का महत्वपूर्ण स्थान है विद्यार्थी या व्यक्ति हर क्षण किसी ना किसी प्रतियोगिता से गुजरता है चाहे में अपने व्यक्तिगत परिस्थितियों से जीतना चाहता है या अपने लक्ष्यों को पाने के लिए। प्रतियोगिता द्वारा विद्यार्थी दूसरे विद्यार्थी से आगे निकलना चाहता है। प्रतियोगिता सामूहिक व व्यक्तिगत हो सकते हैं। सामूहिक प्रतियोगिता से विद्यार्थियों में सहयोग की भावना विकसित होती है। प्रतियोगिता का उचित प्रयोग कर अध्यापक विद्यार्थियों को अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दे सकता है सहयोग से अभिप्रेरणा के विकसित होने की अधिक संभावनाएं होती है। सहयोग लोकतांत्रिक प्रवृत्तियों के विकास के लिए अभी प्रेरित करता है यदि प्रतियोगिता से आपसी मन-मुटाव या द्वेष भावना विकसित ना हो तो प्रतियोगिता अभिप्रेरणा के लिए एक प्रभावशाली विधि है।

10. कक्षा का वातावरण:

विद्यार्थियों के लिए अभिप्रेरित करने वाले प्रविधि (techniques) में कक्षा का वातावरण भी है। जिस कक्षा का वातावरण शांत, सुंदर, शुद्ध हवा, पर्याप्त प्रकाश इत्यादि का होगा तो शिक्षक एवं विद्यार्थी के बीच अच्छे संबंध होंगे। वहीं कोलाहल वातावरण, अंधेरा कक्ष एवं अशुद्ध हवा, बच्चों को प्रभावित करती हैं तथा इसका प्रभाव बच्चों के पढ़ाई पर भी पड़ता है। इसलिए कक्षा का वातावरण भी बच्चों को अभिप्रेरित करने का एक अच्छा माध्यम है जिस कक्षा में सीखने के लिए जितना अच्छा वातावरण होता है उस कक्षा के शिक्षार्थी या विद्यार्थी उतने ही अधिक अभी प्रेरित होते हैं।

11.उचित दृष्टिकोण का विकास:

विद्यार्थियों के परिवारों को अभिप्रेरित करने के लिए विद्यार्थियों की रुचियों और उनके दृष्टिकोण ओं को मान्यता देना भी अभिप्रेरणा की एक महत्वपूर्ण प्रविधि(techniques) है। विद्यार्थियों के दृष्टिकोण से उनकी रुचियों और ध्यान में गहरा संबंध होता है। अतः विद्यार्थियों में उचित दृष्टिकोणों को विकसित करने से और उनकी रूचि के अनुसार अधिगम स्थितियों के निर्माण से उनकी अभिप्रेरणा अधिक संभव होती है। दूसरे शब्दों में बाल केंद्रित दृष्टिकोण अभिप्रेरणा की महत्वपूर्ण प्रविधि है।

12.सीखने की उचित स्थिति और वातावरण

बालक को अभिप्रेरित करने के लिए या उसे सीखने के लिए उचित स्थिति और वातावरण की आवश्यकता होती है अतः शिक्षक को अपने कक्षा में ऐसी वातावरण या स्थिति का निर्माण करना चाहिए जिससे बालक अभिप्रेरित होकर अपनी कार्य में सक्रिय योगदान दे सकें।techniques of motivation

13.असफलता का भय:

स्किनर ने अपने प्रयोगों में पाया कि यदि सीखने वाली को अपनी सफलता क्या ज्ञान तुरंत करा दिया जाए तो वह उसके लिए अभी प्रेरक का कार्य करता है वह उससे आगे के कार्य को और अधिक उत्साह से करता है। सफलता का प्रभाव विद्यार्थियों में अभिप्रेरणा को जगाता है। सामान्य या कम बुद्धि के बच्चों में सफलता बहुत ही शक्तिशाली अभिप्रेरक का कार्य करती है लेकिन दूसरी ओर, असफलता से विद्यार्थी निराश हो जाते हैं। सामान्य बुद्धि के विद्यार्थी असफलता से निरुत्साहित हो जाते हैं लेकिन यही असफलता प्रतिभाशाली छात्रों के लिए एक चुनौती बनकर अभिप्रेरक के रूप में सामने आती है इस प्रकार की अभिप्रेरणा आंतरिक अभिप्रेरणा में शामिल होती है अतः असफलता के भय से विद्यार्थियों को अभी प्रेरित किया जा सकता है।

14.आकांक्षा का स्तर:

आकांक्षा स्तर विद्यार्थियों की योग्यताओं और उनके वातावरण से संबंधित होता है। जिस वस्तु की विद्यार्थी इच्छा करता है और उनका संबंध जीवन के लक्ष्यों से होता है उसे हम आकांक्षा स्तर कहते हैं। विद्यार्थी अगर अपने व्यक्तित्व या योग्यताओं को ध्यान में रखकर अपना आकांक्षा स्तर निर्धारित करता है तो वह उस स्तर को प्राप्त करने के लिए अधिक अभिप्रेरित रहेगा और सफल भी होगा। अध्यापक विद्यार्थियों को उनकी वास्तविकताओं से परिचित करवा कर उनको उनके आकांक्षा स्तर को ऊंचा उठाने के लिए उन्हें अभिप्रेरित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

१५. नयापन या नवीनता: 

विद्यार्थी हमेशा कुछ ना कुछ नया सीखने की इच्छुक रखते हैं बार-बार एक ही प्रकार से सिखाई गई विधि से वे होने लगते हैं तथा उन कार्यों से वे दूर हटने लगते हैं इसलिए शिक्षक को अपने पढ़ाने के तरीकों में हमेशा नयापन या नवीनता लाने की आवश्यकता होती है। ऐसा करने से विद्यार्थी नवीन कार्यों में अधिक रूचि लेते हैं इसी प्रकार अध्यापक की नवीन शिक्षण विधियों (techniques) से भी विद्यार्थी में नई-नई रुचियां उत्पन्न होती है नयापन से परिवर्तन भी होता है और कार्यों में विभिनता भी दिखाई देती हैं जो कि अभिप्रेरित व्यवहार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि बालक को अभिप्रेरित करने के लिए शिक्षक कई प्रकार के प्रविधियों (techniques) का प्रयोग कर सकता है ऊपर दिए गए विधियां उसके अलावा भी बच्चों को अभी प्रेरित करने के और भी अनेक को प्रविधियां(techniques) है जिनका उपयोग कर शिक्षक बालक या विद्यार्थियों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं या उन्हें अभिप्रेरित कर सकते हैं इन सभी प्रविधियां अभिप्रेरणा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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