स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत skinner operant conditioning theory in hindi

स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत skinner operant conditioning theory in hindi

स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत skinner theory of learning in hindi

आज हम इस पोस्ट में स्किनर द्वारा दिए गए सिद्धांत स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत skinner operant conditioning theory in hindi के विषय में पढ़ेंगे। मैं उम्मीद करता हूं कि आप के लिए यह पोस्ट मददगार साबित होगा।

क्रिया प्रसूत अनुबंधन(Operant conditioning) का अर्थ

इसे समझने के लिए हमें अपने स्कूली जीवन(School life) के अतीत में झांकना होगा जब हम स्कूल(School) जाने के नाम से ही थर-थर कांपते थे तथा जिस रिक्शा या बस में जाते थे उस Bus driver या रिक्शा वाले को देख कर हमें क्रोध आता था। उसे हम अपना दुश्मन समझते थे। और अगर हम स्कूल (school) पहुंच भी जाते थे तो हमें स्कूल में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था मम्मी पापा या भाई बहन को याद करके हमें रोना आता था। Teacher के कुछ करने यह कुछ खाना देने पर हम चुप हो जाते थे फिर कुछ देर बाद रोने लगते थे। यही क्रम तब तक चलता रहता था जब तक स्कूल की छुट्टी ना हो जाए और हम अपने घर तक ना पहुंच जाएं। फिर दूसरा दिन आता हमें स्कूल जाने से फिर मना कर देते और रूठ कर बैठ जाते थे। मम्मी पापा के बहुत तैयार करने पर पैसा या टॉफी मिलने पर ही हम स्कूल चाहते थे जिस दिन नहीं मिलता उस दिन हड़ताल करके बैठ जाते थे धीरे-धीरे हम बड़े होते गए और पढ़ाई और दोस्तों में मन लगने लगा आप हम स्वयं ही बिना किसी लालच के स्कूल जाने लगते। Skinner के अनुसार स्कूल आप दोनों ही स्थिति में गए हैं लेकिन पहली स्थिति में लालच आप को स्कूल ले गया जबकि दूसरी स्थिति में पढ़ाई से रुचि लगने से। पहली स्थिति शास्त्री अनुबंधन है तथा दूसरी क्रिया प्रसूत अनुकूलन (Operant conditioning) है। इसलिए Skinner कहते हैं कि पुनर्बलन(reinforcement) करने वाला उत्तेजक अथवा कृत्रिम उत्तेजक अनुक्रिया के साथ यह तुरंत बाद नहीं देना चाहिए बल्कि अपेक्षित अनुक्रिया करने के बाद दिया जाना चाहिए। वे पुनः कहते हैं कि आप पहले प्रयोज्य को अनुक्रिया(response) से संतुष्ट हैं तो उसका पुनर्बलन(reinforcement) करके आगे बढ़िया क्योंकि पुरस्कार पुनर्बलन(reinforcement) के रूप में अनुक्रिया(response) को दृढ़ करता है और पुनः उसी क्रिया को करने के लिए प्रेरित करता है। अंत में सीखने वाला वांछित व्यवहार की पुनरावृति करके वैसे ही व्यवहार (behavior) करने लगता है जैसा दूसरा उससे चाहता है।

स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत skinner operant conditioning theory in hindi
skinner theory of learning in hindi

स्किनर का कबूतर पर प्रयोग (Skinner's experiment on Pigeon)

स्किनर ने कबूतरों पर प्रयोग किया कबूतरों पर प्रयोग (experiment on Pigeon) करने के लिए उन्होंने एक अन्य संयंत्र जिसे कबूतर पंटिका (Pigeon box)कहा जाता है का उपयोग किया। कबूतरों(Pigeon) के साथ किये जाने वाले इस प्रयोग में Skinner यह लक्ष्य सामने रखा कि कबूतर दाहिनी और एक पूरा चक्कर लगाकर एक सुनिश्चित स्थान पर चोंच मारना सीख जाए। कबूतर पंटिका (Pigeon box) में बंद भूखे कबूतर ने जैसे ही दाहिनी ओर घूम कर सुनिश्चित स्थान पर चोंच मारी उसे अनाज का एक दाना प्राप्त हुआ। इस दाने द्वारा कबूतर को अपने सही व्यवहार की पुनरावृति के लिए पुनर्बलन(reinforcement)प्राप्त हुआ। और उसके पुनः दाहिनी ओर घूमकर चोंच मारने की प्रक्रिया की। परिणाम स्वरूप उसे फिर अनाज का एक दाना प्राप्त हुआ। इस प्रकार धीरे-धीरे कबूतर ने दाहिनी ओर सिर घुमाकर एक पूरा चक्कर काटकर चोंच मारने की क्रिया से अनाज प्राप्त करने का ढंग सीख लिया।
       ठीक इसी प्रकार स्किनर ने चिड़िया को भी पिंग पोंग जीना सिखा दिया था। अपने एक अन्य प्रयोग में एक कबूतर को गेंद से भी खेलना सिखा दिया। उसने कबूतर(Pigeon) को एक बंद स्थान में एक छोटी गेंद के साथ जिसे वह अपनी चोंच से हिला-डुला सके रख दिया। अब उसने निरीक्षण किया की वह गेंद के साथ अपनी चोंच से जो हरकत करता है वह किस स्थिति में अधिक करता है भरे पेट में, अंधेरे में, उजाले में यदि उजाले में तो कैसे उजाले में आदि। पुनः जब स्किनर ने उस स्थिति का पता लगा दिया जिसमें कबूतर(Pigeon) गेंद के साथ अधिक हरकत करता है तो उसमें वही स्थिति बार-बार उत्पन्न हुई। जिसे अंततः कबूतर गेंद से खेलना सीख जाता है।

सक्रिय अनुकूलन अनुक्रिया सिद्धांत का शैक्षिक महत्व(skinner operant conditioning theory educational implications in hindi)

१. इस सिद्धांत का प्रयोग जटिल से जटिल कार्यों को सीखने में किया जा सकता है। जैसे Skinner महोदय ने कबूतर को किसी निश्चित जगह पर चोंच मारना सिखाया।
२. स्किनर सीखने में पुनर्बलन(reinforcement) को बहुत अधिक महत्व देते हैं। इस प्रणाली में छात्र अपने गति एवं योग्यता के अनुसार सीखता है। छात्र तभी आगे बढ़ता है जब छात्रों को उसका सही उत्तर देने पर पुनर्बलन दे सके।
३. इस सिद्धांत का उपयोग बालक के व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए किया जा सकता है।
४. यह सिद्धांत(Theory) करके सीखने(Learning) पर अत्याधिक जोर देता है।
५. यह सिद्धांत बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
६. इस सिद्धांत के द्वारा बच्चों में समस्या समाधान विधि का विकास होता है।
७. इस सिद्धांत के अनुसार अनुक्रिया( Response) करने पर कार्य की सफलता के लिए अभिप्रेरणा(motivation) को एक अच्छा स्रोत मिल गया है।
८. इस सिद्धांत के अनुसार सीखने में अधिक से अधिक सफलता तभी मिल सकती हैं। जब सीखने की सामग्री (learning meterial) इस प्रकार आयोजित किया जाए कि सीखने वाले को अधिक से अधिक सफलता मिले और उसी समय उसे सही क्रिया पर पुनर्बलन(reinforcement) मिलना।
९. व्यक्ति के सामूहिक विकास के लिए इस सिद्धांत का प्रयोग किया जा सकता है।
१०. स्किनर के अनुसार(according to Skinner) : "हम अपने आप में वही होते हैं जिसके लिए हमें प्रोत्साहित किया जाता है।"

स्किनर के सिद्धांत की आलोचनाएं

१. इस विधि के द्वारा हम सभी प्रकार के सीखने को प्रभावित नहीं कर सकते हैं।
२. यह विधि यांत्रिक विधि से नहीं बल्कि अपने बुद्धि तरीके से सीख सकता है। यह विधि कहीं न कहीं प्रयत्न एवं भूल(trial and error method) विधि से संबंध रहता है।
३. यह विधि पुनर्बलन(reinforcement) पर ज्यादा जोर देता है जबकि पुनर्बलन के द्वारा ही हर चीज नहीं सीखा जा सकता यह विधि अंतर्दृष्टि को महत्व नहीं देता है। जबकि मनुष्य किसी भी चीज को सीखने में सूझ का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करता है।

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