बुद्धि के सिद्धांत का वर्णन करें buddhi ke siddhant ka varnan karen

बुद्धि के सिद्धांत(theories of intelligence)

बुद्धि की परिभाषा(definition of intelligence) अर्थ तथा प्रकृति के अध्ययन से इस बात का पता चलता है कि बुद्धि(Intelligence) के कार्य क्या होते हैं। बुद्धि के सिद्धांत बुद्धि की संरचना का वर्णन करते हैं। सिद्धांत से यह भी https://www.hindikeguru.com/2021/08/buddhi-kise-kahate-hain.htmlजानकारी प्राप्त होती है कि बुद्धि की संरचना में कौन-कौन से कारक शामिल होते हैं। बुद्धि के प्रमुख सिद्धांत इस प्रकार है-

बिने का एक कारक सिद्धांत (Uni-factor Theory) 

इस सिद्धांत के प्रतिपादन कसरे फ्रांस के मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड बिने(Alfred Binet) को जाता है। बाद में अमेरिका के मनोवैज्ञानिकों टर्मन एवं स्टर्न (Stern) तथा जर्मन वैज्ञानिक एबिंगास (Ebbinghous) ने इस सिद्धांत का समर्थन किया। इस सिद्धांत के अनुसार बुुद्धि(intelligence) वह शक्ति हैं जो समस्त मानसिक कार्यों को प्रभावित करती है। यह समग्र (सभी) ग्रुप वाली बुद्धि(intelligence) एक समय में व्यक्ति को एक ही कार्य करने के लिए अग्रसर करती है। इस सिद्धांत की मान्यता है कि यदि एक व्यक्ति किसी एक विशेष क्षेत्र में निपुण है तो वह अन्य क्षेत्र में भी निपुण होगा। डॉक्टर जानसन जो कि इस सिद्धांत से सहमत थे, उनका विश्वास था कि बुद्धि वह उच्च मानसिक शक्ति है जिसके द्वारा व्यक्ति के समस्त मानसिक गुणों का संचालन होता है। 


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स्पीयर मैन का दो कारक सिद्धांत (two factor theory of intelligence) :

स्पीयर मैन (Spearman)के द्वारा 1904 ईस्वी में दो कारक बुद्धि सिद्धांत(Two factor Theory) दिया गया। स्पीयर मैन के अनुसार बुद्धि के सिद्धांत की संरचना के दो कारक इस प्रकार है-

१. सामान्य कारक (general factor)

२. विशिष्ट कारक(specific factor)


१. सामान्य कारक (general factor)

सामान्य कारक को स्पष्ट करते हुए स्पीयर मैन ने कहा है कि यह एक जन्मजात कारक होता है तथा वयक्तिक विभिन्नता के आधार पर अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग मात्रा में पाया जाता है। जिस व्यक्ति में सामान्य कारक जितना अधिक होता है वह व्यक्ति मानसिक कार्य करने में उतना ही योग्य होता है। स्पीयर मैन ने अपने परीक्षणों के आधार पर यह निष्कर्ष दिया है कि समस्त मानसिक क्रियाएं कुछ सीमा तक सामान्य कारकों पर निर्भर करती है, तथा दो मानसिक क्रियाओं में जितना अधिक सहसंबंध पाया जाता है उतनी ही मात्रा में सामान्य कारक के उपस्थित होने की बात की जाती हैं।

सामान्य कारक की विशेषताएं

i. सामान्य कारक सभी व्यक्तियों में निश्चित मात्रा में पाए जाते हैं।

ii. ये जन्मजात होते हैं उन्हें अर्जित नहीं किया जा सकता है।

iii. इस पर प्रशिक्षण तथा अनुभव का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

iv. विषयों का स्थानांतरण सामान्य कारक के द्वारा ही होता है।

v. दर्शन सामान्य विज्ञान एवं सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों के सीखने में सामान्य कारक महत्वपूर्ण समझे जाते हैं।

निम्न चित्र में इसे G से दर्शाया गया है-


स्पीयर मैन का दो कारक सिद्धांत (Spearman's Two factor Theory)


२. विशिष्ट कारक(specific factor)

व्यक्ति कई प्रकार के मानसिक क्रियाएं करता है इन मानसिक क्रियाओं में कुछ कारक ऐसे हैं जो मानसिक क्रिया एक में होने पर दूसरी में नहीं पाई जाती अर्थात विभिन्न प्रकार की क्रियाओं में भिन्न-भिन्न प्रकार के विशिष्ट कारक उपस्थित होते हैं। उपरोक्त चित्र में विशिष्ट कार को को S1,S2..........S6 से प्रदर्शित किया गया है, यह दर्शाता है की अलग-अलग विशेष कार्यों के लिए अलग-अलग विशिष्ट कारकों की आवश्यकता होती है। ये विशिष्ट कारक किसी व्यक्ति में एक होते हैं तो किसी में एक से अधिक।

स्पीयर मैन के अनुसार विशिष्ट कारक की विशेषताएं इस प्रकार है:-

i. सामान्य कारकों की तरह जन्मजात न होकर अर्जित होते हैं

ii. व्यक्ति में विशिष्टकों की मात्रा निश्चित नहीं होती, यह कम या ज्यादा हो सकती है।

iii. इस कारक को प्रशिक्षण और अनुभव के द्वारा बढ़ाया जा सकता है।

iv. कला हस्तकला संगीत नृत्य तथा गायन जैसे विषयों में विशिष्ट कारक आवश्यक रूप से उपस्थित होते हैं।

    इस प्रकार बुद्धि(intelligence)  के दो कारक सिद्धांत के अनुसार सभी प्रकार की मानसिक क्रियाओं में सामान्य कारक G की आवश्यकता होती है और विभिन्न मानसिक क्रियाओं में विभिन्न विशिष्ट कारकों का स्वतंत्र रूप से प्रयोग होता है। कुछ मानसिक क्रियाओं में सामान्य कारक महत्वपूर्ण होते हैं तो अन्य में विशिष्ट कारक। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि किसी भी विषय के सीखने में दोनों कारकों का होना अनिवार्य है।


थार्नडाइक का बहुकार सिद्धांत (thorndike theory of intelligence, Thorndike's Multifactor theory, P.M.A) :

        इस सिद्धांत को मूल मानसिक योग्यताओं (primary mental ability) का सिद्धांत भी कहते हैं।

         थार्नडाइक ने स्पीयर मैन के सामान्य कारक (G factor) तथा विशिष्ट कारक (specific factor) को नकारते हुए मानसिक योग्यताओं की व्याख्या में मूल कारकों (primary factor) एवं सामान्य कारकों (common factor) का उल्लेख किया। इनका वर्णन इस प्रकार हैै

थार्नडाइक का बहुकार सिद्धांत (Thorndike's Multifactor theory, P.M.A)


i.मूल कारकों (primary factor) 

थार्नडाइक के अनुसार विभिन्न मानसिक योग्यताएं (primary mental abilities) जैसे आंकिक योग्यता (numerical ability), शब्द प्रवाह (word fluency), दैनिक योग्यता(spatial Ability), तार्किक योग्यता(Reasoning availity), स्मृति(memory), शाब्दिक योग्यता(verbal ability) आदि व्यक्ति के समस्त मानसिक क्रियाओं को प्रभावित करती है। उनके अनुसार या आवश्यक नहीं है कि यदि व्यक्ति एक विषय में योग्य हो तो दूसरे विषय में योग्य होगा।


 ii.सामान्य कारकों (common factor):

जब दो मानसिक क्रियाओं के प्रतिपादन में धनात्मक सहसंबंध पाया जाता है यह निश्चित हो जाता है कि यहां पर सामान्य कारक उपस्थित है। सामान्य कारक की मात्रा उनके साथ संबंध की मात्र से प्रदर्शित होता है। दूसरे शब्दों में जैसे कि चित्र में दिखाया गया है दो या दो से अधिक मूल्य कारक आपस में मिलकर संयुक्त रूप से किसी मानसिक क्रिया को प्रभावित करते हो तो वहां पर जो संयुक्त भाग यह  संबंधित भाग होता है व सामान्य कारक (common factor) कहलाता है।


गिलफोर्ड का त्रि-आयाम बुद्धि सिद्धान्त(guilford theory of intelligence)

इस सिद्धांत को बुद्धि संरचना सिद्धांत या एस आई मॉडल के नाम से जाना जाता है गिलफोर्ड 1966 तथा उनके साथियों ने इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
        उनके अनुसार मनुष्य की मानसिक क्रियाओं में अनेक विमाएं पाई जाती है, लेकिन इसके बावजूद इस समानता के आधार पर तीन विमाओं संक्रिया(operations) विषय वस्तु(content) तथा उत्पादों (products) में वर्गीकृत किया जा सकता है। जैसे कि चित्र में दर्शाया गया है। कारक विश्लेषण के आधार पर बुद्धि(intelligence) की यह तीनों विमाएं पर्याप्त रूप से भिन्न है। इनका पृथक पृथक वर्णन इस प्रकार है-

गिलफोर्ड का त्रि-आयाम बुद्धि सिद्धान्त

i. संक्रिया (operations)

संक्रिया का तात्पर्य प्राणी के द्वारा के किये जाने वाले मानसिक क्रियाओं के स्वरूप से है। गिलफोर्ड महोदय ने इस आधार पर मानसिक क्रियाओं को पांच भागों में बांटा है जो इस प्रकार है-

a) मूल्यांकन (evaluation):

       मूल्यांकन का अर्थ प्राणी की उस कार्य क्षमता से है जिसके आधार पर वह सभी पक्षों को ध्यान में रखकर निर्णय करते हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है।

b) अभिसारी चिंतन (convergent thinking)

अभिसारी चिंतन में प्राणी की चिंतन प्रक्रिया केंद्र की ओर उन्मुख होती है। अर्थात वह लीक से न हटकर परंपरागत मूल्य तथा मान्य सूचनाओं को प्रस्तुत करती है।

c) अपसारी चिंतन(Divergent thinking):

अपसारी चिंतन में चूंकी प्राणी केंद्र से विमुख विभिन्न दिशाओं से सोचता है तथा कुछ विविधता तना नवीनता (variety and novelty) को हासिल करने का प्रयास करता है अतः सृजनात्मकता (creativity) से इसका घनिष्ठ संबंध होता है।

d) स्मृति(memory)

स्मृति एक प्रमुख मानसिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत सीखी गई या अनुभव की गती सामग्री को धारण करके रखा जाता है तथा समय आने पर उसका उपयोग किया जाता है।

e) संज्ञान (Cognition)

यह सीखने या अधिगम की महत्वपूर्ण संक्रिया है इसमें चिन्हों संकेतों तथा भाषा के आधार पर ज्ञान प्राप्त किया जाता है।

ii. विषय वस्तु (content)

इसके अंतर्गत बुद्धि(intelligence) के विभिन्न कारको को इस आधार पर / किया गया है कि बुद्धि के प्रमुख विषय वस्तु या सामग्री क्या है। इस सिद्धांत के अनुसार प्रमुख रूप से चार प्रकार की विषय वस्तु मानी गयी है। जो इस प्रकार है-

a) आकृतिक (figural):

आकृतिक विषय वस्तु को आंखों से देख कर पहचाना जा सकता है क्योंकि इसका उद्देश्य स्वयं को प्रदर्शित करना मात्र होता है । यह विभिन्न आकार, रंग, रूप में नजर आती है।

b) सांकेतिक(symbolic):

सांकेतिक विषय वस्तु में प्रायः शब्दों अंकू तथा परंपरागत चिन्हों का प्रयोग होता है, जोकि सामान्यतः अल्फाबेट या अंको की पद्धति के रूप में व्यवस्थित होते हैं।

c) शाब्दिक

बुद्धि का या भाषिक पक्ष होता है। इसमें भाषा या शब्द अपना अर्थ या विचार स्वयं प्रकट करते हैं।

d) व्यवहारिक (behavioural)

प्राणी का समस्त व्यवहार किसी न किसी रूप में प्राणी की बुद्धि को प्रदर्शित करती हैं अतः यह बुद्धि(intelligence) की एक प्रमुख विषय वस्तु है।

iii.उत्पादन (products)

उत्पादन का अर्थ किसी विषय वस्तु के द्वारा की गयी संक्रिया के परिणाम स्वरूप उत्पन्न उत्पादों से है। इनके छह प्रकार बताएं गए हैं तथा सभी कारक विश्लेषण पर आधारित होते हैं। उत्पादन निम्न प्रकार से हैं
a. इकाइयां (Units)
b. वर्ग (Classes)
c. संबंध (Relations)
d. पद्धतियां (Systems)
e. स्थानांतरण (Transfernation)
f. अपादन (Inplications)

आलोचना (criticism)

इस सिद्धांत की आलोचना करते हुए फेयर्स ने कहा गिलफर्ड का सिद्धांत वास्तव में एक सिद्धांत के रूप में नहीं लगता है बल्कि इसे बुद्धि का वर्गीकरण करने की एक पद्धति कहा जाय तो अधिक उचित होगा।


थस्टर्न का समूह कारक सिद्धांत(thurstone theory of intelligence, Thurston's Group factor Theory)

यह सिद्धांत स्पीयर मैन द्वि कारक तथा थार्नडाइक के बहु कारक सिद्धांतों के बीच का सिद्धांत है। इस सिद्धांत के अनुसार बुद्धि न केवल सामान्य कारको(common factors) का प्रदर्शन है और न ही विभिन्न विशिष्ट कारकों (specific factors) का, बल्कि मूल कारकों (primary factor) के समूह के आधार पर बुद्धि के मानसिक कार्य होते हैं।
थस्टर्न महोदय के अनुसार बुद्धि(intelligence) का निर्माण कर लेते हैं जो किसी क्षेत्र विशेष में व्यक्ति की बुद्धि को दर्शाते हैं। ये मूल कारक(primary factor) इस प्रकार है शाब्दिक योग्यता(verbal ability), आंकिक योग्यता( Numerical ability), दैशिक योग्यता (Spatial ability), शब्द प्रवाह (word fluency), तर्कशक्ति (reasoning power), तथा स्मृति (memory) निम्न चित्र में दर्शाया गया है कि ये कारक किस प्रकार समूह का निर्माण करते हैं।
इस प्रकार यह स्पष्ट है कि बुद्धि विभिन्न समूह में पाई जाने वाली अनेक प्रकार की योग्यताओं का मिश्रण है। यद्यपि मानसिक योग्यताएं क्रियात्मक रूप से एक दूसरे से स्वतंत्र होती है फिर भी एक ही समूह की योग्यताओं में परस्पर समानता या सहसंबंध पाया जाता है।


पियाजे का मानसिक बुध्दि का सिद्धांत (Piaget mental growth)

पियाजे के अनुसार बुद्धि(intelligence) एक प्रकार की अनुकूली प्रक्रिया (adaptive process) है जिसमें जैविक परिपक्वता biological maturation) तथा वातावरण के साथ होने वाली अंत: क्रियाएं(interactions) सम्मिलित होती है। इनके अनुसार जैसे-जैसे बच्चों में संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का विकास होते जाता है वैसे वैसे उनका बौद्धिक विकास (intellectual development) भी होते जाता है।
     "पियाजे के विचार में बुद्धि एक ऐसे अनुकूली प्रक्रिया है जिसमें जैविक परिपक्वता का पारंपारिक प्रभाव (interplay) तथा वातावरण के साथ की गयी अन्त: क्रिया ( interaction) दोनों ही सम्मिलित होती हैं। उनके अनुसार बौद्धिक विकास(intellectual development) कुछ संज्ञानात्मक क्रियाओं(Cognitive process) जैसे प्रकृति के नियम को समझना व्याकरण के नियम को समझना तथा गणितीय नियमों को समझना आदि के विकास पर निर्भर करता है।

पदानुक्रमिक बुद्धि का सिद्धांत

पदानुक्रमिक बुद्धि का सिद्धांत बर्ट एवं वर्नन  ने दिया था मनोवैज्ञानिकों ने स्पीयर मैन G कारक सिद्धांत के तत्व (elements), थस्टर्न के समूह कारक सिद्धांत के तत्वों तथा बहु कारक सिद्धांत ( multifactor theory) के तत्वों को एक साथ मिलाकर बुद्धि के एक नए सिद्धांत का प्रतिपादन किया है जिसे पदानुक्रमिक सिद्धांत( Hierarchical theory) की संज्ञा दी गई है।
      पदानुक्रमिक सिद्धांत में बुद्धि को एक पिरामिड से तुलना किया गया जिसमें बुद्धि(intelligence) के भिन्न-भिन्न तत्वों या कारको को एक पदानुक्रम (Hierarchy) के रूप में व्यक्त किया गया। पिरामिड के सबसे ऊपरी स्तर पर स्पीयरमैन के G कारक को रखा गया जिसकी जरूरत सभी तरह के बौद्धिक या मानसिक कार्य को करने में होती है पदानुक्रम (Hierarchy) के दूसरे स्तर पर थस्टर्न के समूह कारक( Thurston's Group factor) के समान दो विस्तृत समूह कारक (broad group factors) होते हैं एक शाब्दिक शैक्षिक कारक (Verbal Educational factor of v: Ed.) तथा दूसरा व्यापारिक यांत्रिक कारक (Practical Mechanical factor or P.m) फिर इन दो प्रमुख समूह कार को (major group factors) को तीसरे स्तर पर अन्य छोटे-छोटे समूह कारकों (minor group factor)  में बांटा  गया है। जो गिलफोर्ड के बहु कारक (multi Factors) के समान है। उसी तरह व्यवहारिक यांत्रिक (practical mechanical factors or p.m) कारक को यांत्रिक कारक (mechanical factor), स्थानिक कारक (Spatial factor), मैचुअल कारक (manual factor) आदि में बांटा गया है। आगे विश्लेषण करके फिर इन कारको को भी छोटे-छोटे उपकार कारकों (Sub factor) में बांटा जा सकता है। पदानुक्रम सिद्धांत के सबसे निचले स्तर पर स्पीयर मैन का S factor होता है जिसके द्वारा एक ऐसी क्षमता का बोध होता है जिसकी जरूरत सिर्फ एक खास मानसिक कार्य में ही होती है।
       इस तरह से हम देखते हैं कि बुद्धि(intelligence) के पदानुक्रमिक सिद्धांत में बुद्धि को एक ऐसा पदानुक्रम मॉडल( Hierarchical model) के रूप में व्यक्त किया गया है जिसका आकार एक वंश वृक्ष(genealogical tree) के समान होता है जहां G कारक सबसे ऊपरी सतह पर तथा S कारक सबसे निचली सतह पर तथा अन्य संकीर्ण समूह कारको (narrower group factors) को इन दोनों के बीच में रखा गया है।



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