वायु प्रदूषण पर निबंध(air pollution essay in hindi)

वायु प्रदूषण पर निबंध(air pollution essay),वायु प्रदूषण कैसे होता है,वायु प्रदूषण के कारण क्या है,वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव का वर्णन कीजिए।

परिचय

पृथ्वी और उसके वातावरण को वायु, जल और मिट्टी के बढ़ते प्रदूषण से गंभीर ख़तरे का सामना करना पड़ रहा है-पृथ्वी की महत्वपूर्ण जीवन समर्थन प्रणाली पर्यावरण की क्षति संसाधनों के अनुचित प्रबंधन या लापरवाह मानवीय गतिविधियों के कारण होती है।  इसलिए कोई भी गतिविधि जो प्रकृति के मूल चरित्र का उल्लंघन करती है और उसके क्षरण की ओर ले जाती है, प्रदूषण कहलाती है।  हमें इन प्रदूषकों के स्रोतों को समझने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के तरीके खोजने की जरूरत है।  यह प्रदूषण के प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करके भी किया जा सकता है।
                    78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन और अन्य सभी गैसों के 1% के साथ वायु पृथ्वी पर जीवन का समर्थन करती है।  सामान्य रूप से गैसों के नियमित प्रतिशत और उनकी संरचना को बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रक्रियाएं होती हैं।हालांकि हवा ज्यादातर ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से बनी है, मानव जाति ने प्रदूषण के माध्यम से कई ट्रेस गैसों के स्तर में वृद्धि की है, और कुछ मामलों में, वातावरण में पूरी तरह से नई गैसों को छोड़ दिया है। वायु प्रदूषण तब होता है जब बड़ी मात्रा में गैस और छोटे कण हवा में छोड़े जाते हैं और पारिस्थितिक संतुलन गड़बड़ा जाता है।  हर साल लाखों टन गैसें और पार्टिकुलेट मैटर हवा में उत्सर्जित होते हैं।
                वायु प्रदूषण के कारण शहरों और ग्रामीण इलाकों में वायु की गुणवत्ता खराब हो सकती है।  कुछ वायु प्रदूषण लोगों को बीमार कर देते हैं, जिससे सांस लेने में समस्या होती है और कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
             कुछ वायु प्रदूषण पौधों, जानवरों और उन पारिस्थितिक तंत्रों के लिए हानिकारक होते हैं जिनमें वे रहते हैं।  अम्लीय वर्षा के रूप में वायु प्रदूषकों द्वारा मूर्तियों, स्मारकों और इमारतों को नष्ट किया जा रहा है।  यह फसलों और जंगलों को भी नुकसान पहुंचाता है, और झीलों और नदियों को मछली और अन्य पौधों और जानवरों के जीवन के लिए अनुपयुक्त बनाता है।
              मानव निर्मित संसाधनों से उत्पन्न वायु प्रदूषण पृथ्वी के वातावरण को भी बदल रहा है।  यह ओजोन परत के क्षरण का कारण बन रहा है और सूर्य से अधिक हानिकारक विकिरण दे रहा है।  वातावरण में छोड़ी गई ग्रीनहाउस गैसें गर्मी को अंतरिक्ष में वापस जाने से रोकती हैं और वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि की ओर ले जाती हैं।  ग्लोबल वार्मिंग औसत समुद्र-स्तर को प्रभावित करती है और उष्णकटिबंधीय रोगों के प्रसार को बढ़ाती है।

वायु प्रदूषण का अर्थ – Air Pollution Meaning

हमारी पृथ्वी पांच तत्वों से मिलकर बनी है जिनमें से एक तत्व वायु भी है पृथ्वी पर समस्त जीव जंतु एवं प्राणी वायु यानी कि ऑक्सीजन से जीवित है वायु में कई गैस मिश्रित हैं जैसे कार्बन डाइऑक्साइड जो पेड़ पौधों के लिए अत्यंत आवश्यक है और पेड़ पौधों से प्राप्त ऑक्सीजन मनुष्य के लिए। वायु मंडल के न होने से हमारा जीवन असंभव सा लगता है क्योंकि वायुमंडल हमारे लिए एक कंबल का काम करता है जिससे कि हमारे वातावरण संतुलित रहता है अगर वायुमंडल नहीं होंगे तो तापमान अधिक या फिर अत्यंत काम हो जाएंगे जिससे पेड़ पौधे एवं प्राणी जगत जीवित नहीं रह पाएंगे साथ ही वायुमंडल हमें अल्ट्रावायलेट किरणों से भी रक्षा करता है।

    वायु प्रदूषण होने का प्रमुख कारण है पृथ्वी पर उपस्थित विषैली गैसों की मात्राओं में अधिक बढ़ोतरी, वायु में उपस्थित गैसों पर बाहरी प्रभाव यानी कि प्राकृतिक और मानवीय कारणों से वायु प्रदूषण होने लगा है। वायु प्रदूषण को बढ़ावा देने में सबसे अधिक मानव जिम्मेदार हैं बढ़ते औद्योगिकरण मानव जीवन को कम करते जा रहा है। पृथ्वी पर उपस्थित सभी प्राणी ऑक्सीजन से ही जीवित हैं जो कि वातावरण में 21% ही है लेकिन वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा कम होते ही जा रहे हैं ऑक्सीजन के साथ कई प्रकार के विषैली गैस घुल रही है।वायुमंडलीय प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत हो सकते हैं, उदाहरण के लिए, ज्वालामुखी विस्फोट।  मानव निर्मित प्रक्रियाओं जैसे ऊर्जा उत्पादन, अपशिष्ट भस्मीकरण, परिवहन, वनों की कटाई और कृषि के गैसीय उपोत्पाद प्रमुख वायु प्रदूषक हैं।


वायु प्रदूषण के प्रकार (Type of air pollution in hindi)

वायु प्रदूषण के प्रमुख प्रकार इस प्रकार से हैं-

1. विविक्त प्रदूषण: 

विविक्त प्रदूषण ऐसे प्रदूषण होते हैं जिसमें धूल राख आदि मिले हुए होते हैं जो वायु में ठोस रूप में उड़ते हुए पाए जाते हैं इस प्रकार के प्रदूषण कल कारखानों जंगल में लगे आग ज्वालामुखी के फटने से उनसे निकलने वाली धूल या राख वायु में घुल जाते हैं जिससे वायु प्रदूषित हो जाता है इसी को विविक्त प्रदूषण कहते हैं। ये कण बड़े-बड़े आकार के होते हैं और पृथ्वी की सतह पर फैलकर प्रदूषण फैलाते हैं।


2. गैसीय प्रदूषण -

 वायुमंडल गैसों के मिलने से बना है तथा मानव की अपनी जरूरतों के अनुसार कई प्रकार के गैसों का निर्माण करते हैं साथ ही प्राकृतिक तत्वों के मिश्रण से भी अनेकों गैसों का निर्माण होता है जब वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर के ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड जैसे गैसों की मात्रा वायुमंडल में बढ़ती है जिसके कारण वायुमंडल प्रदूषित हो जाता है यही गैसीय प्रदूषण कहलाता है।


3. रासायनिक प्रदूषण -

रासायनिक प्रदूषण एक ऐसा वायु प्रदूषण है जो रासायनिक प्रक्रिया से बनने वाले विषैले गैस होते हैं जो मानव जीवन को क्षति पहुंचाते हैं एक गैसे इतनी खतरनाक होते हैं कि इनसे जीवन संकटमय जान पड़ता है। सैनिक प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियां सीधी मानव शरीर को नष्ट करने लगती है जो बहुत ही खतरनाक साबित होती है इस प्रकार के जैसे हैं एक तो कर खानों से निकलने वाली धुँए, वाहन से निकलने वाली गैसे तथा वैज्ञानिक प्रयोग किए जाने से खतरनाक गैसों का निर्माण होता है। जो वायु मंडल को तो प्रदूषित करता ही है साथ ही मानव जीवन को भी संकट में ला देता है।


4. धुआँ धुन्ध  प्रदूषण - 

वायुमण्डल में अत्यंत छोटे-छोटे धूल कण होते हैं जो वायु को प्रदूषित करने लगते हैं ठंड के समय में ये धुआँ व कोहरा, वायु और जलवाष्प के साथ मिल जाती है और कोहरा अधिक बनाती हैं जिससे लोगों को इन धूल कणों के कारण घुटन सा लगता है और वे ठीक प्रकार से देख भी नहीं पाते हैं।


वायु प्रदूषण के स्रोत क्या है – Sources of Air Pollution in hindi

वायु प्रदूषण को देखते हुए वायु प्रदूषण के स्रोत को दो भाग में बांट सकते हैं-
A.वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत
B. वायु प्रदूषण के मानवीय स्रोत 

A. वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत –

(i) वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत में ज्वालामुखी के फटने या चट्टानों के टूटकर गिरने से  जो धूल कण और दूषित गैस निकलते हैं वे वायु मण्डल में मिलकर वायु मण्डल को प्रदूषित करते हैं हालांकि या सीमित या क्षेत्रीय होता है पर उस सीमित क्षेत्र को बहुत ज्यादा प्रदूषित कर देता है।
(ii) कभी-कभी जंगलों में भीषण आग लग जाती है जो हजारों वर्ग किलोमीटर तक फैलती जाती है जंगलों के जलने से धुआं, राख और छोटी-छोटी कम वायुमंडल में मिल जाती है तथा दूर-दूर तक फैल जाती है। जिससे भी वायु प्रदूषित हो जाता है।
(iii) प्राकृतिक मौसम के कारण जैसे तेज हवाओं एवं अंधी-तूफान आने से धूल के कण वायु मण्डल में फैलते हैं, जिसके कारण भी वायु प्रदूषित हो जाता है यह भी वायु प्रदूषण के स्रोत हैं।
(iv) खनिजों के कण और समुद्री लवण के कण भी वायु प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं।
(v) वायुमंडल में फैला कोहरा भी प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बन जाता है।
(vi) वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत में किसी भी पदार्थं के सड़ने गलने से जो विषैली गैस निकलती है पदार्थ के सड़ने से भारी मात्रा में ‘मिथेन गैस’ जो कि विषैली गैस होती है वायु मंडल को दूषित कर देते हैं।
(vii) पृथ्वी में मौजूद कुछ ऐसे जीव जंतु है या पेड़ पौधे है जिसे विषैले कैसे निकलते हैं अगर उन जीव-जंतुओं या पेड़ पौधों की संख्या बढ़ जाती है तो उसे निकलने वाली गैस की मात्रा भी बढ़ने लगती हैं जो वायु को प्रदूषित करने का एक प्रमुख कारण बन जाती हैं।

B.वायु प्रदूषण के मानवीय स्रोत –

मनुष्य अपने दिनचर्या में अनेक ऐसे काम करते हैं जिससे प्रकृति को क्षति पहुंचती है इनमें से एक कारण वायु प्रदूषण भी है। मानव अपने जीवन को सरल बनाने के लिए बहुत सारी चीज़ों का आविष्कार किया है उन्हीं आविष्कारों का ग़लत तथा अत्यधिक प्रयोग से वायु प्रदूषित होता है जैसे उद्योग, परिवहन, विभिन्न ऊर्जा के उपयोग, रसायनों के इस्तेमाल, औद्योगिक विकास जैसे अनेक सुविधाएं कहीं न कहीं से वायु प्रदूषण को बढ़ावा देता है।
(i)
वायु प्रदूषण को बढ़ावा देने में मुख्य भूमिका निभाता है अपने घरों में उपयोग किये जाने वाले ईंधन। हम अपने घरों में  खाना बनाने के लिए जो ईंधन का प्रयोग करते हैं उससे निकलने वाली गैस वायु को प्रदूषित करते हैं लकड़ी, कोयला,गोबर, मिट्टी का तेल आदि इनके जलने से कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, सल्फर-डाई-ऑक्साइड गैस निकलती है जो वायु को प्रदूषित करते हैं।

(ii)
यातायात या परिवहन के बढ़ती विकास के साथ ही साथ वायु प्रदूषण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

(iii)
बढ़ती कारखानों एवं परिवहन में जो ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है और उससे निकलने वाली गैस और धुआं से विषैली गैस के साथ साथ हानिकारक प्रदूषित तत्व निकलते हैं जो वायु को बहुत ज्यादा प्रदूषित कर रहे हैं जैसे कोयला से चलने वाली ट्रेन, बड़े बड़े रासायनिक उद्योग इत्यादि।

                

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