बछेंद्री पाल की कहानी क्लास 5 प्रश्न उत्तर ( bachendri pal class 5 question answer)

बछेंद्री पाल क्लास 5 प्रश्न उत्तर bachendri pal class 5 question answer

बछेंद्री पाल क्लास 5 प्रश्न उत्तर bachendri pal class 5 question answer

इस पोस्ट में आपको पश्चिम बंगाल बोर्ड के पांचवी कक्षा के हिंदी से संबंधित प्रश्नोत्तर मिलेगा जो कक्षा पांचवी के हिंदी पुस्तक से पाठ 11वां 'बछेंद्री पाल' से लिया गया है।

बछेंद्री पाल पाठ का सारांश, बछेंद्री पाल पाठ का सार

यह पाठ हिमालय की बेटी बछेंद्री पाल की आत्मकथा पर आधारित है। जहां भारत की महिलाएं ऊंचाइयों से डरते हैं वही बछेंद्री पाल ने संसार की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएं किसी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। उनमें साहस और धैर्य की कमी नहीं है। यदि महिलाएं ठान ले तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकती है। इन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला बनी। यही नहीं संसार की सबसे ऊंची शिखर को छूने वाली विश्व की पांचवीं महिला भी बनी।

       बछेंद्री पाल का जन्म उत्तर काशी (उत्तरांचल) के नाकुरी गांव में हुआ था। बचपन से ही बछेंद्री पाल को पर्वत बहुत आकर्षित करती थी। जब वे एम.ए. की पढ़ाई कर रही थी तो उनके मन में पर्वतराज हिमालय की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की इच्छा जागी। उसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया। वहां उन्होंने बड़ी लगन और मेहनत से पर्वतारोहण के गुण सीखें और कुशलता प्राप्त की। एवरेस्ट यात्रा से पहले उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान द्वारा आयोजित प्री-एवरेस्ट ट्रेनिंग कैंप-कम-एक्सपीडिशन में भी भाग लिया।

            बचपन में देखी सपने को पूरा करने का वह दिन आ ही गया। एवरेस्ट विजय अभियान में बछेंद्री पाल को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। फिर भी वे लगातार उन कठिनाइयों को पार करते हुए आगे बढ़ती रही। अंतिम चढ़ाई के दौरान उन्हें साढ़े छः घंटे तक लगातार चढ़ाई करनी पड़ी। इनकी कठिनाई तब और बढ़ गई जब इनके एक साथी के पांव में चोट लग गई। तब इनकी गति धीमी पड़ गई फिर भी हर कठिनाई का साहस और धैर्य से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ती ही रही और आखिरकार 23 मई सन् 1984 ईस्वी को दोपहर 1:00 बजकर 7 मिनट पर वे एवरेस्ट के शिखर पर थी। इस प्रकार विश्व के उच्चतम को जीतने वाली सर्वप्रथम पर्वतारोही भारतीय महिला बनने का अभूतपूर्व गौरव प्राप्त कर लिया। इसी से प्रेरित होकर हमारे देश की सुश्री संतोष यादव नामक एक महिला जो कि पुलिस अधिकारी थी। वह भी 1992 और 1993 में लगातार दो बार एवरेस्ट की सफलतापूर्वक चढ़ाई की।


१. संक्षेप में उत्तर दो।

१.१. बछेंद्री पाल का जन्म कहां हुआ था?

उत्तर: बछेंद्री पाल का जन्म उत्तर काशी (उत्तरांचल) के नाकुरी गांव में हुआ था।


१.२. उन्हें कौन आकर्षित करता था?

उत्तर: उन्हें पर्वत आकर्षित करता था।


१.३. उनके मन में कौन सी इच्छा बलवती हुई?

उत्तर: उनके मन में पर्वतराज हिमालय की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की इच्छा बलवती हुई।


१.४. कौन सा दिन सम्मान और गौरव का दिन था?

उत्तर: 23 मई सन् 1984 का दिन सम्मान और गौरव का दिन था।


१.५. क्या महिलाएं पुरुषों से पीछे हैं?

उत्तर: बिल्कुल भी नहीं।


१.६. कितने घंटे उन्होंने लगातार चढ़ाई की?

उत्तर: अंतिम चढ़ाई के दौरान उन्होंने साढ़े छः घंटे तक लगातार चढ़ाई की।


२. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में लिखो।

२.१. बछेंद्री पाल ने किस पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया था?

उत्तर: बछेंद्री पाल ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया था।


२.२. पर्वतारोहण संस्थान कौन सा कार्य करवाता है?

उत्तर: पर्वतारोहण संस्थान पर्वतों पर चढ़ने की प्रशिक्षण देता है। तथा पर्वतारोहण के दौरान किन-किन कठिनाइयों का सामना किया जा सकता है उससे अवगत कराता है।


२.३. पर्वतारोहण एक जोखिम भरा कार्य है, किस प्रकार?

उत्तर : पर्वतारोहण एक जोखिम भरा कार्य है क्योंकि ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना बहुत ही मुश्किल कार्य है। चढ़ाई करते समय बहुत सावधानी रखनी होती है क्योंकि एक छोटी सी भूल से व्यक्ति नीचे गिर सकता है और उन्हें चोट लग सकती है या कहें की ऊंचाई से गिरने के बाद उनकी मौत भी हो सकती है।


२.४. अपने लक्ष्य को पाने के लिए हमें क्या करना पड़ता है?

उत्तर : अपने लक्ष्य को पाने के लिए हमें कठिन परिश्रम के साथ-साथ धैर्य रखते हुए निरंतर आगे बढ़ना पड़ता है।


२.५. साहस और दृढ़ निश्चय हमें कहां पहुंचा सकते हैं?

उत्तर : साहस और दृढ़ निश्चय हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकते हैं।


२.६. बछेंद्री पाल की एवरेस्ट पर मिली सफलता क्या साबित करती है?

उत्तर : बछेंद्री पाल की एवरेस्ट पर मिली सफलता यह साबित करती है कि महिलाएं भी किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है। उनमें साहस और धैर्य की कमी नहीं है। यदि महिलाएं ठान ले तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी अपने परिश्रम और दृढ़ निश्चय से प्राप्त कर सकती है।


३. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग कर वाक्य बनाओ।

      (शिखर, बचपन, परिश्रम, लक्ष्य, धैर्य)

शिखर : श्याम एवरेस्ट की शिखर तक सफलता पूर्वक पहुंचा।

बचपन : मुझे अपने बचपन का दिन याद है।

परिश्रम : परिश्रम के बिना कुछ नहीं मिलता।

लक्ष्य : हमें अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

धैर्य : हर इंसान को अपने जीवन में धैर्य रखना चाहिए।


४. हिमालय के तीन पर्यायवाची शब्द लिखो।

हिमालय: पर्वतराज, हिमगिरि, गिरिराज, हिमपति


५. पढ़ो और समझो।

अव्यय शब्द : अव्यय शब्द ऐसे शब्द को कहते हैं जिसमें लिंग, वाचन, कारक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है जैसे- 

वह धीरे-धीरे चलता है। वह धीरे-धीरे चलती है।

वह कब गया? वे कब गये।

वह बहुत रोया। वह बहुत रोयी।

वह क्यों गया? वे क्यों गयी।

वह आया था, परंतु तुम नहीं मिले।

कपड़े पसंद थे, लेकिन मेरे पास पैसे कम थे।

काम पूरा हो चुका है इसलिए तुम जा सकते हो।


६.नीचे दिए गए अव्यय शब्दों का प्रयोग करते हुए एक-एक वाक्य बनाओ।

और : मैं और मेरी बहन बाजार गए थे।

अब: पता नहीं अब मेरे साथ क्या होगा।


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