श्रुतिलेख क्या होता है - श्रुतलेख कैसे लिखते हैं

आप सभी का इस आर्टिकल में मैं स्वागत करता हूं। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से श्रुतिलेख क्या होता है किसे कहते हैं तथा कैसे लिखा जाता है इसके बारे में जानेंगे।अक्सर हम सुनते हैं कि बच्चों को उनके क्लास में श्रुतिलेख कराया जाता है श्रुतिलेख लेख वर्ग L.K.G से ऊपर किसी भी वर्ग के लिए कराया जा सकता है। तो आये बिना किसी देरी के श्रुतिलेख के बारे में पढ़ें।
श्रुतिलेख क्या होता है - श्रुतलेख कैसे लिखते हैं

श्रुतिलेख क्या होता है

श्रुतिलेख एक प्रकार के लेखन की विधि है जिसमें एक व्यक्ति जो कुछ भी बोलता या कहता है उसे दूसरे व्यक्ति को शुद्ध-शुद्ध बिना किसी वर्तनी की गलती किये लिखना होता है श्रुतिलेख में एक-एक शब्द भी लिखाया जा सकता है या कुछ अनुच्छेद भी लिखाया जा सकता है। श्रुतिलेख लिखते समय हमें व्याकरण की बड़ी दक्षतापूर्ण इस्तेमाल करना होता है।

श्रुतिलेख का अर्थ

श्रुतिलेख दो शब्दों के मेल से बना है श्रुति और लेख। श्रुति का अर्थ सुनना और लेख का अर्थ लिखना या लेखन होता है अर्थात श्रुतिलेख का अर्थ हुआ सुनकर लिखना।
             अक्सर हम अपने दिनचर्या में श्रुतिलेख करते ही रहते हैं।

श्रुतिलेख किसे कहते हैं

किसी एक व्यक्ति के मुंह से निकले हुए ध्वनि को दूसरा व्यक्ति सुनकर उसे शब्दों में ढलता है उसे ही श्रुतिलेख कहा जाता है।

श्रुतिलेख कैसे लिखा जाता है

श्रुतिलेख लेखन का एक ऐसा विधि है जिसमें वर्तनी की अशुद्धियों की जांच की जाती है। श्रुतिलेख करने से (लिखने से) पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

१.श्रुतिलेख कराने वाले व्यक्ति की भाषा शुद्ध एवं स्पष्ट होनी चाहिए।

२.श्रुतिलेख में कान का सबसे बड़ा योगदान होता है क्योंकि जैसा सुनाई देता है व्यक्ति वैसे ही लिखता है।

३.लिखने वाले की वर्तनी भी साफ़ और स्पष्ट होना चाहिए ताकि जांच करने वाले व्यक्ति को पढ़ने में कोई दिक्कत न आए।

४.श्रुतिलेख करते समय हमेशा आपका ध्यान उस व्यक्ति के शब्दों पर होना चाहिए।

५. वाक्य तथा अनुच्छेद के लिए व्याकरण की भी जानकारी होनी चाहिए।

श्रुतिलेख के गुण एवं दोष

श्रुतिलेख के गुण एवं दोष की बात की जाए तो श्रुतिलेख के निम्नलिखित गुण एवं दोष है-
गुण
१.श्रुतिलेख एक प्रकार के मनोविज्ञानिक विधि है।

२.श्रुतिलेख से बालक के भाषा की शुद्धता का विकास होता है।

३.श्रुतिलेख से बालक के श्रावण तथा लेखन कौशल का विकास होता है।

४. इसके माध्यम से बालक के मनोबल का विकास होता है।

५. शब्दों की शुद्धता का विकास होता है।

दोष

१. योग्य शिक्षकों का अभाव

२. अधिक समय का खर्च होना

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